कानपुर। उन्नाव जिले की भगवंत नगर सीट से सात बार के विधायक रहे भगवती सिंह विशारद जी ने सोमवार की सुबह अंतिम सांस ली।
विशारद जी का जन्म वर्ष 1921 में 23 सितंबर को उन्नाव के झगरपुर गांव में हुआ था। वर्तमान में 98 वर्षीय विशारद जी कानपुर के धनकुïट्टी मोहल्ले में रह रहे थे। वह उन्नाव की भगवंत नगर विधानसभा क्षेत्र से सात बार विधायक रह चुके थे। उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ और 1957 में वह प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से भगवंत नगर सीट से चुनाव जीते। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी खत्म होने पर वह कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाजसेवा मे ही गुजार दिया। विधायक रहते समय उनके हाथ में थैला रहता था, जिसमें उनका लेटर पैड और मुहर होती थी। किसी की समस्या सुनकर वह खुद पत्र लिखते और मुहर लगाकर उस विभाग में देने चल जाते थे।
अंग्रेजों के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में भाग लिया। उन्होंने बीकॉम किया और फिर हिंदी साहित्य में विशारद किया, जो उपाधि नाम से जुड़ गई। सादगी उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रही। गांव के गलियारों से पैदल चलकर हमेशा रोडवेज बस से विधानसभा पहुंचे और राजनीति में नया इतिहास रचा। यही कारण रहा लोगों ने उन्हें उन्नाव के गांधी की उपाधि से हमेशा नवाजा।
वह अपने पीछे परिवार में बेटे रघुवीर, बहू कमला, पौत्र अनुराग, पौत्रवधू सुनीता, परपौत्र अभिषेक और पुत्र नरेश सिंह व बहू चंदा को छोड़ गए हैं। उनके पुत्र रघुवीर उन्नाव के गांव में रहते हैं।